Thursday, April 7, 2011

पर्व त्यौहार

8 अप्रैल :श्रीपंचमी, श्रीरामराज्याभिषेकदिवस,  हयव्रत,अनंतनाग पंचमी [जम्मू-कश्मीर], रोहिणी व्रत [जैन], पशुपतीश्वर-दर्शन[काशी], चैती छठ का खरना, दशलक्षणव्रत 10दिन एवं पुष्पांजलि व्रत 5दिन [दिग.जैन]
9 अप्रैल :स्कन्द [कुमार] षष्ठी व्रत, सूर्यषष्ठीव्रत [चैती छठ], यमुना जयंती महोत्सव, वासंतीदुर्गापूजा-   बिल्वाभिमंत्रण षष्ठी [मिथिलांचल], अशोकाषष्ठी
10 अप्रैल :वासंतीदुर्गा-पूजा प्रारंभ, पत्रिका प्रवेश [मिथिलांचल], महासप्तमीव्रत, कालरात्रि सप्तमी, कमला सप्तमी, नवपदओली शुरू [श्वेत.जैन]
11 अप्रैल :श्रीदुर्गा-महाष्टमीव्रत, अशोकाष्टमी[बंगाल], श्रीअन्नपूर्णाष्टमीव्रत एवं परिक्त्रमा [काशी],        महानिशापूजा, सांईबाबाउत्सव 3दिन [शिरडी]
12 अप्रैल :श्रीरामनवमीव्रत, श्रीरामजन्मभूमि- दर्शन [अयोध्या], तारा महाविद्याजयंती, श्रीदुर्गा-महानवमी,स्वामी नारायण जयंती [अक्षरधाम], जवारे विसर्जन
13 अप्रैल :चैत्रीविजयादशमी [मिथिलांचल], दशहरा [मालवा], धर्मराज दशमी, व्यतिपातमहापात देर रात 1.09से प्रात:5.36 तक
14 अप्रैल: कामदाएकादशी व्रत, श्रीलक्ष्मीनारायणदोलोत्सव, फूलडोलग्यारस,श्रीबांकेबिहारीजी महाराज का फूलबंगलाबनना शुरू [वृंदावन], चडकपूजा [बंगाल], डा. अम्बेडकर जयंती, वैशाखी

दस साल बाद कल बनेगा दुर्लभ लक्ष्मी योग

इस नवरात्रि में कल शुक्रवार 8 अप्रैल को पंचमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के साथ रत्नांकुर नाम का शुभ लक्ष्मी योग बन रहा है। ये योग आज से 10 दस साल पहले 2001 में बना था। कुछ विद्वानों के अनुसार शुक्र और चंद्र मिलकर लक्ष्मी योग बनाते हैं। कल शुक्रवार को रोहिणी नक्षत्र है जो कि चंद्रमा का नक्षत्र है। इसलिए शुभ लक्ष्मी योग बन रहा है।इस लक्ष्मी योग में अगर आप लक्ष्मी प्राप्ति के लिए कुछ छोटे छोटे उपाय करें तो आपके घर में बरकत बनी रहेगी साथ ही हमेशा के लिए आपके घर में लक्ष्मी का निवास रहेगा।नवरात्रि में पंचमी को लक्ष्मी जी की तिथि माना हैं इस दिन लक्ष्मी के उपाय करने से लक्ष्मी जी की विशेष कृपा होती है। नवरात्री में पंचमी पर लक्ष्मी के साथ धन एवं ऐश्वर्य के अधिपति देवता शुक्र का भी दिन है इसलिए इस दिन अगर धन प्राप्ति के कोई उपाय करें तो निश्चित ही लाभ मिलेगा।इसलिए शुक्रवार और पंचमी का दिन धन संबंधित प्रयोग के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
1. लक्ष्मी जी को कमल पुष्प और कमल गट्टे अर्पित करें।
2. सोने या चांदी की लक्ष्मी प्रतिमा का पूजन कर के धन स्थान पर रखें।
3. सात शुक्रवार तक 10 वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को गाय के दूध की खीर खीलाएं तो आपको जल्दी ही  इसके शुभ परिणाम मिलेंगे।
4. धन प्राप्ति के लिए आप अपने पास चांदी का शुक्र यंत्र रखें।
5. भोजपत्र पर लाल चंदन से श्रीं: लिख कर उसकी पूजा करें।
6. स्फटिक श्री यंत्र की स्थापना करें तो आपके घर में दो तरफ से लक्ष्मी आएगी।
7. मां लक्ष्मी को शुद्ध गाय के घी का दीपक लगाएं।
8. सुगंधित सफेद फूल महालक्ष्मी जी को चढ़ाएं।
9. पिता से सोना लेकर धारण करें या धन स्थान पर रख कर पूजा करें तो जल्दी ही कमाई का अन्य साधन मिल जाएगा।
10. भाई या बहन को शुक्र देव के लिए सफेद वस्त्र के साथ चांदी का सिक्का दें।
11. माता से सफेद कपड़े में चावल और चांदी का सिक्का लेकर धन स्थान पर रखने से मां लक्ष्मी प्रस्रन्न होगी।

Wednesday, April 6, 2011

समय की कमी हो तो देव पूजा के लिए यह उपाय अपनाएं



आज के भागदौड़ भरें जीवन में धार्मिक आस्था रखने वाले अनेक लोग चाहकर भी जब देव उपासना से वंचित रहते हैं तो कहीं न कहीं उनका मन बेचैन रहता है। वहीं कुछ लोग अति महत्वाकांक्षाओं के चलते देव स्मरण से दूर हो जाते हैं। इसलिए यहां बताया जा रहा है ऐसे ही लोगों के लिए ऐसे देवता के स्मरण का छोटा-सा उपाय जो समय की कमी होने पर भी अपनाया जा सकता है और जीवन में आने वाली अनचाही परेशानियों से बचा जा सकता है। जीवन से जुड़ा कोई भी कार्य हो शुभ और अच्छी शुरूआत बेहतर नतीजों को नियत कर देती है। जब काम को शुरू और बिना विघ्रों के सफलता पाने की बात होती है तो हिन्दू धर्म में भगवान श्री गणेश का ही स्मरण किया जाता है। भगवान श्री गणेश की उपासना के लिए चतुर्थी, बुधवार का बहुत महत्व है। अगर आप दिन और काम की अच्छी शुरूआत चाहते हैं तो भगवान श्री गणेश के स्मरण का यह छोटा-सा तरीका अपनाए- सुबह स्नान के बाद देवालय या भगवान श्री गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने यह मंत्र बोल कर धूप या अगरबत्ती लगाएं - 

वनस्पतिरसोद्भूतों गन्धाढ्यो गन्ध उत्तम:। आघ्रेय सर्वदेवानां धूपो यं प्रतिगृह्यताम।।
 

श्री गणेश को धूप या अगरबत्ती दिखाकर इस मंत्र से श्री गणेश का ध्यान कर लें-

अभीप्सितार्थसिद्धयर्थं पूजितो य: सुरासुरै:। सर्वविघ्रहरस्तस्मै गणाधिपतये नमो नम:।।

इसके बाद भगवान श्री गणेश को प्रणाम कर दिन और काम बिन बाधा पूरा होने की कामना कर कार्य के लिए निकलें। यह उपाय आप कार्यस्थल पर पवित्रता का ध्यान रखते हुए अपना सकते हैं।