भगवान को भोग लगे और तुलसी दल न हो तो भोग अधूरा ही माना जाता है। तुलसी को परंपरा से भोग में रखा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार तुलसी को विष्णु जी की प्रिय मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार तुलसी डालकर भोग लगाने पर चार भार चांदी व एक भार सोने के दान के बराबर पुण्य मिलता है और बिना तुलसी के भगवान भोग ग्रहण नहीं करते उसे अस्वीकार कर देते हैं।
Wednesday, May 11, 2011
Tuesday, May 10, 2011
Monday, May 9, 2011
Sunday, May 8, 2011
हिन्दू धर्म के संस्कार
सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस्कारों का महती योगदान है।
Saturday, May 7, 2011
पर्व त्यौहार
पर्व त्यौहार
मई सन् 2011
व्रत एवं पर्व
1 मई: मासिक शिवरात्रि व्रत, अक्कलकोट के श्रीस्वामी समर्थ जी महाराज की महासमाधि तिथि (महाराष्ट्र), श्रमिक दिवस,
2 मई: श्राद्ध की अमावस, सोमवती अमावस्या पर्वकाल प्रात: 10.23 बजे से, सोमवारी व्रत (मिथिलांचल), पाक्षिक प्रतिक्रमण (श्वेत.जैन)
3 मई: स्नान-दान की वैशाखी अमावस्या, भौमवती अमावस, गंगा-स्नान करोड़ों सूर्यग्रहणतुल्य फलदायक, शुकदेव मुनि जयंती, पंचकोसी-पंचेशानि यात्रा पूर्ण (उज्जयिनी), सौर ऊर्जा दिवस, अन्तर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस
किसी आध्यात्मिक पुरुष या विशेष व्यक्ति को गरिमा प्रदान करने और सम्मान देने के लिए उसके नाम के आगे श्री लिखने का प्रचलन है। श्री की उत्पत्ति और अस्तित्व के संदर्भ में वेद, पुराण, उपनिषदों और किंवदंतियोंमें अलग-अलग व्याख्या दी गई है। कहीं लक्ष्मी को श्री कहा गया है, तो कहीं अलग-अलग होते हुए एक होने की बात कही गई है।
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