Friday, April 29, 2011

रुद्राक्ष की महिमा

एक बार देवर्षि नारद ने भगवान नारायण से पूछा-“दयानिधान!रुद्राक्ष को श्रेष्ठ क्यों माना जाता है? इसकी क्या महिमा है? सभी के लिए यह पूजनीय क्यों है?रुद्राक्ष की महिमा को आप विस्तार से बताकर मेरी जिज्ञासा शांत करें।” देवर्षि नारद की बात सुनकर भगवान् नारायण बोले-“हे देवर्षि! प्राचीन समय में यही प्रश्न कार्तिकेय ने भगवान् महादेव से पूछा था। तब उन्होंने जो कुछ बताया था,वही मैं तुम्हें बताता हूँ:

Thursday, April 28, 2011

शिव प्रिय रुद्राक्ष

रुद्राक्ष भगवान शंकर का प्रिय आभूषण है। दीर्घायु प्रदान करने वाला तथा अकाल मृत्यु को समाप्त करने वाला है। यह जहाँ गृहस्थ व्यक्तियों के लिए अर्थ और काम को प्रदान करता है वहीं संन्यासियों के लिए धर्म और मोक्ष को देने वाला है। मनुष्य की अनेक शारीरिक और मानसिक व्याधियों को दूर करने वाला, मन को शांति प्रदान करने वाला तथा योगियों की कुंडलिनी जागृत करने में सहायक होता है।

Wednesday, April 27, 2011

रुद्राक्ष का महत्व


रुद्राक्ष धारयेद्बुध: के अनुसार ज्ञानी जनों को रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष को भगवान शिव की आंख कहा जाता है। त्रिपुर नामक दैत्य को मारने हेतु भगवान शंकर ने कालाग्निनामक शस्त्र जब धारण किया तभी अश्रु पात होने से रुद्राक्ष की उत्पत्ति बताई गयी है।

Tuesday, April 26, 2011

शादी में आ रही रूकावट दूर करे



रुद्राक्ष के बारे में हम सभी लोगों ने सुना होगा। यह भगवान शिव के आभूषण माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि इसकी उत्पत्ति भगवा शंकर की आंसू से हुई है। रुद्राक्ष कई प्रकार का होता है। इस पर जितनी धारियां होती हैं वह रुद्राक्ष उतना मुखी कहलाता है। हर रुद्राक्ष की अपनी एक अलग विशेषता होती है, जैसे रुद्राक्ष में यदि बारह धारियां है तो वह बारहमुखी रुद्राक्ष कहलायेगा।

Monday, April 25, 2011

पति-पत्नी का रिश्ता



पति-पत्नी का रिश्ता बड़ा नाजुक होता है। छोटी सी गलतफहमी इस रिश्ते को तोड़ सकती है। कई बार ऐसा होता भी है। वर्तमान के समय काम का बोझ व दूसरी जिम्मेदारियों के चलते पति-पत्नी एक-दूसरे को समय नहीं दे पाते। ऐसे में उनके बीच दूरियां बढऩे लगती है और कई बार यह रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाता है।

Sunday, April 24, 2011

संकल्प और समर्पण



संकल्प और समर्पण। अगर अर्थ की दृष्टि से देखा जाए, तो दोनों ही विरोधाभासीबातें हैं। या तो आप संकल्प कर सकते हैं, या फिर समर्पण। जैसे युद्ध में सामने वाले ने हथियार छोड दिए, तो समझो कि समर्पण हो गया। जब तक लड रहे थे, तो संकल्प से लड रहे थे।